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नोएडा अथॉरिटी के इस पहल से फ्लैट खरीदारों को होगा फायदा, बिल्डर अब नहीं कर पाएंगे मनमानी। समय से मिलेगा फ्लैट!

Written By: गली न्यूज

Published On: Saturday May 6, 2023

नोएडा अथॉरिटी के इस पहल से फ्लैट खरीदारों को होगा फायदा, बिल्डर अब नहीं कर पाएंगे मनमानी। समय से मिलेगा फ्लैट!

डिफॉल्ट बिल्डरों पर नकेल कसने के लिए लगातार नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) नकेल कसने की कोशिश में जुटी है। इसी कोशिश के तहत अब एक बार फिर नोएडा अथॉरिटी बिल्डरों पर और सख्ती बरतने जा रही है। अब बेईमान बिल्डर के बेइमानी को रोकने के लिए अथॉरिटी ने नई पहल की है। इस पहल के तहत अब हरेक बिल्डर के परियोजना का एस्क्रो एकाउंट खोला जाएगा। इस एकाउंट का मकदस सीधे तौर पर बिल्डर पर लगाम लगाना है।

बिल्डरों के लिए खुलेंगे एस्क्रो एकाउंट

नोएडा अथॉरिटी ने अपनी ओर से बड़ी पहल की है। इसी पहल के तहत अब बिल्डर परियोजना का एस्क्रो एकाउंट खोला जाएगा। मतलब, फ्लैट ख़रीदारों से मिलने वाला पैसा सीधे बिल्डरों के खातों में नहीं जाएगा, बल्कि साझा बैंक खातों में जमा होगा। यानी अब नोएडा अथॉरिटी के साथ मिलकर बिल्डर एस्क्रो एकाउंट खोलेंगे। ये एकाउंट खोलने की शुरूआत इसी महीने होगी। इसके बाद बिल्डर खरीदारों से बुकिंग के नाम पर मिलने वाले पैसों में हेराफेरी नहीं कर सकेंगे। तय अनुपात के तहत प्राधिकरण को उसका बकाया मिलता रहेगा।

क्या है एस्क्रो एकाउंट

रेरा अधिनियम (Rera Act) के तहत किसी आवासीय परियोजना के लिए घर खरीदारों से मिलने वाली अग्रिम राशि का 70% एक एस्क्रो खाते में जमा किया जाना अनिवार्य होता है। मतलब, जो भी पैसा घर खरीदार बिल्डर को देंगे उसका 70 परसेंट एस्क्रो खाते में जाएगा। बाकी का 30 परसेंट पैसा बिल्डर को जाता है। जिससे वो प्रोजेक्ट को पूरा करता है। जैसे-जैसे परियोजना की प्रगति होती है, वैसे वैसे उसको एस्क्रो अकाउंट से पैसा जारी कर दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बिल्डर घर खरीदारों के पैसे का गलत इस्तेमाल न कर सके। उस पैसे का इस्तेमाल किसी दूसरे काम या प्रोजेक्ट में न लगा सके। जिस परियोजना के लिए पैसा दिया गया है, पैसा उसी परियोजना में लगेगा। बिल्डर के खाते का हर छह महीने में एक चार्टर्ड एकाउंटेंट से ऑडिट करवाया जाता है। सिर्फ ये चेक करने के लिए बिल्डर कहीं इस पैसे को डायवर्ट तो नहीं कर रहा है। इसका फायदा घर खरीदारों को होता है।

बिल्डरों के 194 प्रोजेक्ट के लिए एस्क्रो एकाउंट खोलने की मंजूरी दी

नोएडा में बिल्डरों की ग्रुप हाउसिंग से जुड़ी करीब 115 परियोजनाएं हैं। इनके अलावा करीब 79 स्पोर्टस सिटी की परियोजनाएं हैं। चिंता की बात यह है कि बिल्डर खरीदारों से पैसा ले रहे हैं लेकिन प्राधिकरण का बकाया नहीं दे रहे हैं। फ्लैट बुकिंग नहीं होने का रोना रोकर बिल्डर पैसा देने से पीछे हट रहे हैं। अब प्राधिकरण ने इसका समाधान निकाल लिया है। हर निर्माणाधीन बिल्डर परियोजना का एस्क्रो एकाउंट खुलवाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए सीईओ रितु माहेश्वरी ने मंजूरी दे दी है। प्राधिकरण अधिकारियों कहना है कि इसके लिए एक एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसी महीने से एकाउंट खुलवाने का काम शुरू हो जाएगा।

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सबसे पहले स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट पर लागू होगा सिस्टम

करीब 10-12 साल पहले नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-78, सेक्टर-79, सेक्टर-101, सेक्टर-150 और सेक्टर152 में चार बिल्डरों को स्पोर्टस सिटी के लिए जमीन दी थी। लेकिन अब यहां पर ये भूखंड करीब 79 टुकड़ों में बिक चुके हैं। यहां बिल्डरों ने खेल सुविधाएं विकसित करने के बजाए फ्लैट व व्यावासयिक प्रॉपर्टी बना दीं हैं। इन बिल्डरों पर प्राधिकरण का करीब 8,200 करोड़ रुपये बकाया है। जनवरी 2021 से प्राधिकरण ने स्पोर्टस सिटी की परियोजना के लिए नक्शा पास करने और अधिभोग प्रमाण पत्र जारी करने आदि पर रोक लगा रखी है, लेकिन बिल्डर फ्लैटों की धड़ल्ले से बुकिंग कर रहे हैं। बुकिंग करने के बावजूद प्राधिकरण का बकाया नहीं दे रहे हैं। इस वजह से सबसे पहले स्पोर्टस सिटी की परियोजनाओं के एकाउंट खोले जाएंगे।

फ्लैट खरीदारों को कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी अटकीं

बिल्डर प्राधिकरण का बकाया नहीं दे रहे हैं। इस वजह से प्राधिकरण रजिस्ट्री की अनुमति नहीं दे रहा है। ऐसे में नोएडा में 30-40 हजार खरीदारों की रजिस्ट्री अटकी पड़ी हैं। स्पोर्टस सिटी की परियोजनाओं में ही 10-15 हजार फ्लैट की रजिस्ट्री अटकी पड़ी हैं। वहीं कुछ बिल्डर अपनी परियोजनाओं को पूरा नहीं कर रहे हैं। जिसकी वजह से 60-70 हजार लोग अपने फ्लैट मिलने के इंतजार में हैं।

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पांच परियोजनाओं के खुले एस्क्रो एकाउंट कागजी रह गए

कुछ साल पहले ग्रुप हाउसिंग की चार और एक व्यावसायिक परियोजना के एस्क्रो एकाउंट खोले गए थे। इनमें ग्रुप हाउसिंग में लॉजिक्स बिल्डर और व्यावासयिक में वेब ग्रुप की एक परियोजना शामिल थी। प्राधिकरण की ओर से एकाउंट से संबंधित जानकारी मांगी गईं, जो बिल्डरों ने नहीं दीं। ऐसे में वह एकाउंट भी औपरचारिकता बनकर रह गए। वेव बिल्डर के खिलाफ अथॉरिटी ने एक्शन लिया। उसका सिटी सेंटर प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया। लॉजिक्स बिल्डर से जुड़ा मामला एनसीएलटी में चल रहा है।

डिफ़ॉल्टर बिल्डरों पर 35 हजार करोड़ रुपये बकाया

ग्रुप हाउसिंग, स्पोर्टस सिटी और व्यावासायिक संपत्ति से जुड़े बिल्डरों पर प्राधिकरण के करीब 35 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। जिनमें सबसे ज्यादा ग्रुप हाउसिंग से जुड़े बिल्डरों पर 20 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। यह पैसा वसूल करने के लिए नोएडा अथॉरिटी को पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। सीईओ रितु माहेश्वरी ने बिल्डरों से पैसा वसूलने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमा लड़ा है।

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