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Anti CAA Protest: एंटी सीएए दंगे के दौरान प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई, कार्ट ने लिया फैसला

Written By: गली न्यूज

Published On: Saturday December 24, 2022

Anti CAA Protest: एंटी सीएए दंगे के दौरान प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई, कार्ट ने लिया फैसला

Anti CAA Protest:  उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में दंगा करने वालों से ही अब नुकसान की भरपाई की जाएगी. दिसंबर 2019 में एंटी सीएए दंगे (Anti CAA Protest) के दौरान अमरोहा में जिन लोगों ने सरकारी और प्राइवेट प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया था उनसे अब लाखों की वसूली होगी. उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली दावा न्यायाधिकरण कोर्ट (Uttar Pradesh Public and Private Property Damage Recovery Claims Tribunal Court)ने यह फैसला सुनाया है. यूपी में दंगाइयों के खिलाफ यह पहला फैसला कोर्ट ने दिया है.

क्या है मामला ?

दरअसल, दिसंबर 2019 में अमरोहा में CAA (Citizen Amendment Act) को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान लाखों की प्रॉपर्टी का नुकसान हुआ था, इस मामले में मुकदमा किया गया, जिसमें 55 लोग आरोपी बनाए गए. दंगे में हुए नुकसान की वसूली के लिए पुलिस ने दावा कोर्ट मेरठ में अपील की थी. दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने 86 लोगों को आरोपी मानते हुए वसूली का आदेश दिए हैं. कोर्ट के फैसले के अनुसार 86 आरोपी से 4,27,439 रुपये की वसूली की जाएगी. यानी CAA प्रदर्शन के दौरान प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई की तैयारी है.

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डीएम को भेजी गई आदेश की कॉपी

डीएम को कोर्ट के आदेश की कॉपी भेज दी गई है, जिसमें वसूली के बाद कोर्ट को अवगत कराने की बात भी कही गई है. दंगाइयों की प्रॉपर्टी से इस रकम की वसूली जाएगी. अहम बात यह है कि प्रदेश में इस तरह का पहला फैसला सुनाया गया है, ताकि आगे से उत्तर प्रदेश में किसी की दंगा करने की हिम्मत न हो सके.

क्या है CAA ?

नागरिकता संसोधन अधिनियम यानी सीएए (Citizen Amendment Act) को आसान भाषा में समझा जाए तो इसके तहत भारत के तीन मुस्लिम पड़ोसी देश- पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम प्रवासी इनमें भी 6 समुदाय हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी को भारत की नागरिकता देने के नियम को आसान बनाया गया है. इससे पहले भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 11 साल तक भारत में रहना जरूरी था. नागरिकता संसोधन अधिनियम 2019 के तहत इस नियम को आसान बनाया गया है और नागरिकता हासिल करने की अवधि को 1 से 6 साल किया गया है.

क्या करता है ये कानून

ये कानून उन्हें खुद ब खुद नागरिकता नहीं देता है बल्कि उन्हें आवेदन करने के लिए योग्य बनाता है. ये कानून उन लोगों पर लागू होगा जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए थे. इस कानून के तहत भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए प्रवासियों को आवेदन करना होगा.

  • प्रवासियों को दिखाना होगा कि वो भारत में पांच साल रह चुके हैं.
  • उन्हें ये साबित करना होगा कि वे अपने देशों से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए हैं.
  • वो उन भाषाओं को बोलते हैं जो संविधान की आठवीं अनुसूची में हैं. इसके साथ ही नागरिक कानून 1955 की तीसरी सूची की अनिवार्यताओं को पूरा करते हों.
  • इसके बाद ही प्रवासी आवेदन के पात्र होंगे. उसके बाद भी भारत सरकार निर्णय करेगी कि इन लोगों को नागरिकता देनी या नहीं.

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