June 23, 2024, 7:29 pm

Rudraksha: रुद्राक्ष के फायदे, इन बीमारियों से मिलेगा छुटकारा

Written By: गली न्यूज

Published On: Monday August 7, 2023

Rudraksha: रुद्राक्ष के फायदे, इन बीमारियों से मिलेगा छुटकारा

Rudraksha: हिंदू धर्म में रुद्राक्ष (Rudraksha) को बहुत शुभ माना गया है. रुद्राक्ष का जुड़ाव भगवान शिव से माना जाता है. मान्यता है कि रुद्राक्ष के पेड़ शिव के आंसुओं से बने हैं. इसे धारण करते ही व्यक्ति सकारात्मकता से भर जाता है. इतना ही नहीं, उसे कई तरह की समस्याओं और भय से निजात मिलती है. संस्कृत में रुद्र का मतलब शिव और अक्ष आंसुओं का प्रतीक है. रुद्राक्ष का फल पहले हरा, फिर गहरा नीला और अंत में गहरे भूरे रंग का हो जाता है. क्या आपको पता है कि रुद्राक्ष से कई तरह की बीमारियां दूर होती है. आइये हम आपको बताते है.

रुद्राक्ष पहनने से दिल की बीमारियां दूर होती हैं

रुद्राक्ष को धार्मिक महत्व के कारण पहना जाता है लेकिन इसके सेहत से जुड़े कई फायदे भी हैं. रुद्राक्ष पहनने से कई बीमारियां ठीक हो सकती हैं. एक रिसचर्स में पाया गया है कि रुद्राक्ष से डायबिटीज और हृदय के रोगियों को काफी फायदा होता है. रुद्राक्ष को गले में पहनना सबसे बेहतर माना जाता है. 108 मनकों वाले रुद्राक्ष को इस तरह पहना जाता है कि वो हृदय के स्थान को बार-बार टच करता रहे. इससे हृदय गति बेहतर होती है. गले में रुद्राक्ष पहनने से टौंसिल, थॉयराइड जैसी बीमारियों में भी राहत मिलती है.

सिर पर भी रुद्राक्ष पहनने से लाभ मिलता है

जानकारों का कहना है कि रुद्राक्ष की माला पहनने से स्ट्रेस या डिप्रेशन नहीं होता. इससे मानसिक बीमारियां ठीक हो सकती हैं. कई लोग सिर पर भी रुद्राक्ष पहनते हैं. जो लोग गंभीर रूप से मानसिक बीमारियों से जूझते हैं वो चार, पांच और छह मुखी वाले 550 मनकों को धागे में पिरोकर पहनते हैं. यह देखने में रुद्राक्ष का मुकुट जैसा होता है. माना जाता है कि इससे मानसिक बीमारियां ठीक होती हैं.

बता दें कि, कई लोग मेडिटेशन करने के लिए भी रुद्राक्ष की कई लड़ियां सिर पर पहनते हैं. रुद्राक्ष के मनकों से कॉन्सन्ट्रेशन, फोकस और मेंटल स्टैमिना बढ़ता है. एक रिसर्च में बताया है कि अलग-अलग मुखी वाले रुद्राक्ष में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रॉपर्टीज होती हैं. इससे इलेक्ट्रिक इम्पल्सेज निकलती हैं. जब रुद्राक्ष पहनते हैं तो इससे ब्रेन पर भी अच्छा असर पड़ता है.

रुद्राक्ष पहनने से सिर दर्द, माइग्रेन दूर

बता दें कि, 11 मुखी वाले रुद्राक्ष को धागे में पिरोकर सिर पर पहनने से सिर दर्द, माइग्रेन दूर होता है. इससे मेमोरी भी मजबूत होती है. रुद्राक्ष सेल फोन से निकले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी के असर को कम करता है. इसमें एंटी एजिंग प्रॉपर्टी भी है.

रुद्राक्ष का पानी पीने से ब्लड प्रेशर कम होता है

कहा जाता है कि रुद्राक्ष के बीज को पानी से भरे हुए बर्तन में रातभर रखें. सुबह इस पानी को खाली पेट पीने से सेहत को लाभ होता है. इससे ब्लड प्रेशर कम होता है और हार्ट बीट भी नॉर्मल रहती है.

रुद्राक्ष का पानी घाव को ठीक करता है

रुद्राक्ष के कई इस्तेमाल हैं. इसके पानी को स्किन पर लगाने से इन्फेक्शन दूर होता है इसे घाव पर लगाया जा सकता है. रुद्राक्ष के पानी से सर्दी-खांसी भी ठीक होती है. योग में जलनेति के जरिए इसे ठीक किया जाता है. इस पानी को आंखों में भी डाला जा सकता है. स्किन के जलने पर रुद्राक्ष के पाउडर को चंदन पाउडर या नारियल के तेल में मिलाकर लगाया जा सकता है. रुद्राक्ष मिले पानी से स्नान करने पर स्किन भी बेहतर होती है. रुद्राक्ष के पाउडर से फेस मास्क भी तैयार किया जाता है.।

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कैसे पहचानें कौन सा रुद्राक्ष सही

रुद्राक्ष को दो बराबर भागों में काटकर देखा जा सकता है कि मनके के अंदर की संरचना बाहर के मुखी से मिलती है या नहीं. एक्स-रे या सीटी स्कैन से भी यह पता किया जा सकता है.

रुद्राक्ष को कैसे सुरक्षित रखें

पुराने दिनों में रुद्राक्ष को चीटियों से या खराब होने से बचाने के लिए केसर, हल्दी, पीली सरसों, कुमकुम के साथ रखा जाता था. मनके को प्रिजर्व करने और उसे गहरा रंग देने के लिए उसे सरसों तेल या चंदन के तेल में भी रखा जाता था. हालांकि आज भी इन चीजों का इस्तेमाल रुद्राक्ष को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.

रुद्राक्ष टूट जाए तो क्या करें

रुद्राक्ष कितने समय तक सुरक्षित रहेगा, यह नहीं कहा जा सका. गले में पहनने के दौरान पानी से भीगने, गलने, धूप में रहने से कई बार रुद्राक्ष टूट जाता है. कई बार रुद्राक्ष खंडित हो जाता है या घिस जाता है तब इसे लाल धागे में प्रवाहित कर देना चाहिए.

रुद्राक्ष धारण करने के क्या हैं नियम

रुद्राक्ष का सीधा संबंध भगवान शिव से माना गया है. भगवान शिव से जुड़े होने के कारण रुद्राक्ष को बहुत ही पवित्र माना जाता है. इसलिए इसे धारण करने को लेकर कई नियम हैं. रुद्राक्ष की माला बनवाते समय ध्यान रखें कि उसमें कम से कम 27 मनके जरूर हों.

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