February 25, 2024, 12:18 am

Ritika Surin Success Story: पिता चपरासी-मां करती हैं सफाई, बेटी ने पलट दी किस्मत, मिला 20 लाख का पैकेज

Written By: गली न्यूज

Published On: Friday January 27, 2023

Ritika Surin Success Story: पिता चपरासी-मां करती हैं सफाई, बेटी ने पलट दी किस्मत, मिला 20 लाख का पैकेज

Ritika Surin Success Story: “टूटने लगे हौसले तो ये याद रखना, बिना मेहनत के तख्तों-ताज नहीं मिलते, ढूंढ लेते हैं अंधेरों में मंजिल अपनी, क्योंकि जुगनू कभी रोशनी के मोहताज नहीं होते.” इस लाइन को सच कर दिखाया है झारखंड की रितिका सुरीन ने. आज इस सफलता की कहानी (Success Story) में हम आपके लिए लेकर आए हैं रितिका सुरीन की कहानी.

ग्रेटर नोएडा के निजी कॉलेज में पढ़ने वाली रितिका को 20 लाख रुपये सालाना पैकेज का कॉलेज प्लेसमेंट (College Placement) मिला है. रितिका को मिली इस सफलता के बाद उनके माता-पिता बेहद खुश हैं. रितिका के पिता नवल सुरीन ने कहा कि-मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी बेटी पढ़ेगी और इतना अच्छा करेगी. किसी तरह से कठिनाई में जीवन काट कर हमने बेटी को पढ़ाया है. हमें तो हिंदी भी ठीक से बोलने नहीं आती, लेकिन रितिका तो खूब अच्छी अंग्रेजी बोलती है.

पहले प्रयास में मिली बड़ी कामयाबी

कुछ दिनों पहले रितिका के कॉलेज में एक साफ्टवेयर कंपनी प्लेसमेंट के लिए आई थी. रितिका की कड़ी मेहनत और प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने पहले ही प्रयास में उन्हें 20 लाख रुपये का पैकेज मिला.

गरीब परिवार से आती है रितिका

रितिका का प्लेसमेंट ऑटो डेस्क कंपनी में हुआ है. उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है. उनके माता-पिता परिवार के पालन-पोषण की खातिर 20 साल पहले झारखंड से नोएडा आए थे. उसके बाद वे यहां से वापस नहीं जा सकें और यहीं अपनी दुनिया बसा ली.

रितिका का कहना है कि मुझे खुद को प्रूव करना है कि जो मौका मुझे मिला उसे मैं डिजर्व करती हूं. मैंने अपनी मां को कड़ी मेहनत करते देखा है. मैंने जिस कॉलेज से एमबीए किया, मेरे पिता वहीं चपरासी का का काम करते हैं. ये सब मैं कभी भूल नहीं सकती.”

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कॉलेज मैनेजमेंट ने किया भरपूर सहयोग

रितिका ने जिस निजा संस्थान से अपना एमबीए कंप्लीट किया, वहां के सीईओ का कहना है, “रितिका दूसरे स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं. रितिका के अच्छे नंबर और पारिवारिक स्थिति को देखते हुए 50 प्रतिशत स्कालरशिप दी गई थी. साथ ही कोर्स की किताबें फ्री में अवेलेबल कराई गई थीं.”

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