December 9, 2022, 12:13 am

Hot Iron on Student: होमवर्क ना करने पर टीचर ने ढाया जुल्म, गर्म लोहे से दागा। क्या कहते हैं नियम , ऐसे टीचर की क्या सजा?

Written By: गली न्यूज

Published On: Thursday September 15, 2022

Hot Iron on Student: होमवर्क ना करने पर टीचर ने ढाया जुल्म, गर्म लोहे से दागा। क्या कहते हैं नियम , ऐसे टीचर की क्या सजा?

Hot Iron on Student: अगर कोई स्टूडेंट होमवर्क पूरा ना करे तो उसकी क्या सजा है? यह सवाल इसलिए लाजिमी है क्योंकि महाराष्ट्र से एक ऐसी खौफनाक खबर सामने आई है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यहां एक टीचर ने होमवर्क पूरा ना करने की ऐसी सजा दी है कि आपकी रुह सिहर उठेगी।

क्या है मामला ?

चौंका देने वाला यह पूरा मामला मुंबई से सटे नवी मुंबई इलाके की है। यहां के खारघर में एक महिला टीचर ने साढ़े तीन साल की मासूम को खौफनाक सजा (Hot Iron on Student) दी। हिला शिक्षक ने गुस्से में साढ़े तीन साल की बच्ची को गरम लोहे से दाग दिया। और यह सजा केवल इसलिए क्योंकि मासूम ने होमवर्क पूरा नहीं किया था। महिला ने गुस्से में आकर बच्ची को गरम लोहे से चटका दिया।

कौन है आरोपी महिला टीचर ?

https://gulynews.com को मिली जानकारी के मुताबिक गरम लोह से मासूम को चटका देने वाली महिला टीचर खारघर की रहने वाली है। खारघर के मकरंद विहार के सेक्टर 15 स्थित घरकुल सोसाइटी में रहती है। घर पर ही वो बच्चों को ट्यूशन क्लास देती है। अजीनाथ बावरे की साढ़े तीन साल की बेटी भी इसी टीचिंग क्लास में पढ़ती है। 8 सितंबर को भी यह बच्ची रोज की तरह ट्यूशन गई थी। मेशा की तरह उसके माता-पिता ने उसे शाम 4 बजे क्लास को छोड़ दिया और रात 8 बजे अपनी लडकी को वापस क्लास से लिया। लेकिन रात में जब उस मासूम के पैरेंट्स ने उसे देखा तो दंग रह गए। मासूम बच्ची के गालों और हाथों पर लाल चटक थी और पीड़िता कुछ बोल नहीं पा रही थी। हालांकि देर रात मामले का खुलासा हुआ और यह साफ हो गया कि उसे गरम चट्टे दिये हैं।

क्या हैं हालात ?

आनन-फानन में मासूम के पैरेंट्स ने उसका इलाज करवाया। जिसके बाद से मासूम की तबीयत स्थिर है। फिलहाल आरोपी महिला टीचर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में महिला शिक्षक के खिलाफ बाल शोषण की धारा के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि अभी तक उस महिला टीचर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब बच्चों के साथ बर्बरता की गई है। इसके पहले राजस्थान के चूरु जिले में भी होमवर्क ना करने पर एक टीचर ने बच्चे की इतनी पिटाई कर दी कि उसकी मौत हो गई थी। अब इस घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर से कॉर्पोरल पनिशमेंट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कॉर्पोरल पनिशमेंट क्या है?

कॉर्पोरल पनिशमेंट से मतलब शारीरिक और मानसिक सजा देना होता है। जिसमें चांटा मारने से लेकर कान खींचना शामिल हैं। इस तरह की सजाओं पर कई एक्सपर्ट का मानना है कि इससे बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। इसके परिणाम स्वरूप वह किसी भी तरह के कदम भी उठा सकते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि स्कूलों में कॉर्पोरल पनिशमेंट के तहत बच्चे में अनुशासन स्थापित करना गलत है।

क्या कहते हैं नियम ?

बच्चों की पिटाई के मामलों में कमी लाने के लिए केंद्र सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 यानि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (Juvenile Justice Act) लागू किया है। लेकिन इसके अलावा भी देश में कई कानून और गाइडलाइनंस हैं जो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

  • शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 17 के तहत किसी भी तरह के शारीरिक दंड, मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह से प्रतिबंधित है.
  • इसके अलावा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 82 के तहत भी जेल और जुर्माने का प्रावधान है.
  • जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 75 में कहा गया है कि बच्चे की देखभाल और उनकी सुरक्षा स्कूल की जिम्मेदारी होगी.

नियमों का उल्लंघन होने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है. अगर कोई दोषी पाया जाता है तो 5 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है। अगर यह पाया जाता है कि किसी वजह से बच्चा मानसिक बीमारी का शिकार हो गया है तो फिर 3 से 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

CBSE की गाइडलाइंस के तहत अगर स्कूल किसी भी नियम का उल्लंघन करता है, तो उसकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है. सीबीएसई ऐसी घटनाओं को लेकर कई बार स्कूलों को धारा 82 से अवगत करवाते आया है।

  • धारा 82 (1) के तहत फिजिकल पनिशमेंट देने पर शिक्षक को 10 हजार रुपए का जुर्माना हो सकता है.
  • अपराध दोहराने पर तीन महीने की जेल का भी प्रावधान है।
  • धारा 82 (2) के तहत शिक्षक को सस्पेंड कर दिया जाता है.
  • वहीं धारा 82 (3) के तहत अगर जांच में सहयोग नहीं किया तो तीन माहीने की सजा का प्रावधान है.
  • स्कूल पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा

साफ है बच्चों को इस तरह की शारीरिक सजा देना ना केवल गैरकानूनी है बल्कि अपने आप में एक अपराध भी है लिहाजा टीचर्स को इसका पूरा ख्याल रखना चाहिए। ताकि किसी भी मासूम पर जुल्म ना हो।

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